श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 35: पापकर्मके प्रायश्चित्तोंका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.35.7 
षड्‍‍भिर्वर्षै: कृच्छ्रभोजी ब्रह्महा पूयते नर:।
मासे मासे समश्नंस्तु त्रिभिर्वर्षै: प्रमुच्यते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्महत्या करने वाला व्यक्ति यदि कृच्छव्रत के अनुसार भोजन करे तो वह छह वर्ष में ही शुद्ध हो जाता है और यदि वह प्रति माह एक कृच्छव्रत का पालन करते हुए भोजन करे तो वह तीन वर्ष में ही पापों से मुक्त हो जाता है।
 
If a person who has committed brahminicide eats food according to the Krichchhvrata, he becomes pure in six years. And if he eats food while observing one Krichchhvrata every month, he becomes free from sins in three years only.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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