| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 35: पापकर्मके प्रायश्चित्तोंका वर्णन » श्लोक 49 |
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| | | | श्लोक 12.35.49  | स राजन् मोक्ष्यसे पापात् तेन पूर्णेन हेतुना।
प्राणार्थं वा धनेनैषामथवा नृपकर्मणा॥ ४९॥ | | | | | | अनुवाद | | हे मनुष्यों के स्वामी! आपने प्राण बचाने, धन प्राप्ति अथवा राज-कर्म के लिए ही शत्रुओं का वध किया है; अतः आपके पापों से मुक्त होने के लिए यही पर्याप्त कारण है ॥ 49॥ | | | | O lord of men! You have killed your enemies only to save your life, to gain wealth or to fulfil your royal duties; therefore, this is sufficient reason for you to be free from sins. ॥ 49॥ | | ✨ ai-generated | | |
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