श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 35: पापकर्मके प्रायश्चित्तोंका वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.35.40 
शुभाशुभफलं प्रेत्य लभते भूतसाक्षिकम्।
अतिरिच्येत यो यत्र तत्कर्ता लभते फलम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य जो अच्छे-बुरे कर्म करता है, उसके साक्षी ये पाँच महाभूत हैं। उन अच्छे-बुरे कर्मों का फल उसे मृत्यु के बाद मिलता है। कर्ता को दोनों प्रकार के कर्मों में से जो अधिक अच्छा होता है, उसका फल मिलता है।॥40॥
 
The five great elements are witnesses to the good and bad deeds that a man does. The fruit of those good and bad deeds is received by him after death. The doer receives the fruit of the greater of the two types of deeds.॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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