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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 35: पापकर्मके प्रायश्चित्तोंका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.35.26 
धनं तु यस्यापहरेत् तस्मै दद्यात् समं वसु।
विविधेनाभ्युपायेन तदा मुच्येत किल्बिषात्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यदि विभिन्न उपायों से जिस व्यक्ति का धन चुराया गया है, वह उसे उतना ही धन लौटा दे, तो वह उस पाप से मुक्त हो सकता है।
 
If, by using various means, the person whose wealth has been stolen returns the same amount to him, then he can be freed from that sin. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)