Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.35.19: राजन! जो मदिरा पीकर ईर्ष्या और द्वेष से रहित हो जाता है और भूमि का दान करके फिर कभी उसे नहीं पीता, वह अनुष्ठान करने के बाद पवित्र हो जाता है॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.35: पापकर्मके प्रायश्चित्तोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 35: पापकर्मके प्रायश्चित्तोंका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.35.19 
भूमिप्रदानं कुर्याद् य: सुरां पीत्वा विमत्सर:।
पुनर्न च पिबेद् राजन् संस्कृत: स च शुद्‍ध्यति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
राजन! जो मदिरा पीकर ईर्ष्या और द्वेष से रहित हो जाता है और भूमि का दान करके फिर कभी उसे नहीं पीता, वह अनुष्ठान करने के बाद पवित्र हो जाता है॥19॥
 
Rajan! The one who is free from jealousy and hatred after drinking alcohol and donates land and never drinks it again, becomes pure after performing the rituals. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)