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mahabharat 12.35.13: जब मृत्यु का समय निकट आ जाए, तब मनुष्य पुण्यात्मा और दरिद्र ब्राह्मणों को एक हजार पूर्ण दूध देने वाली गौएँ दान करके सभी पापों से मुक्त हो जाता है ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.35: पापकर्मके प्रायश्चित्तोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 35: पापकर्मके प्रायश्चित्तोंका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.35.13 
गोसहस्रं सवत्सानां दोग्ध्रीणां प्राणसंशये।
साधुभ्यो वै दरिद्रेभ्यो दत्त्वा मुच्येत किल्बिषात् ॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जब मृत्यु का समय निकट आ जाए, तब मनुष्य पुण्यात्मा और दरिद्र ब्राह्मणों को एक हजार पूर्ण दूध देने वाली गौएँ दान करके सभी पापों से मुक्त हो जाता है ॥13॥
 
When the time of death is near, a man can be freed from all sins by donating one thousand full-fledged milk-giving cows to virtuous and poor Brahmins. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)