Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.349.9-11: वैशम्पायनजी बोले - राजन! मेरे धर्मपरायण गुरु वेदव्यास तपस्वी और ज्ञान से परिपूर्ण हैं। पहले वे वेदों के अर्थ का यथार्थ ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा से हिमालय की एक चोटी पर रहते थे। महाभारत नामक इतिहास लिखकर तपस्या करते-करते वे थक गए थे। उन दिनों हम पाँच शिष्य, उन बुद्धिमान गुरु की सेवा में तत्पर होकर उनके साथ रहते थे। सुमन्तु, जैमिनी, पैल - ये सब उत्तम धर्म का दृढ़तापूर्वक पालन करने वाले थे, चौथे मैं था और पाँचवें व्यासपुत्र शुकदेव थे। 9-11॥ | mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी बोले - राजन! मेरे धर्मपरायण गुरु वेदव्यास तपस्वी और ज्ञान से परिपूर्ण हैं। पहले वे वेदों के अर्थ का यथार्थ ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा से हिमालय की एक चोटी पर रहते थे। महाभारत नामक इतिहास लिखकर तपस्या करते-करते वे थक गए थे। उन दिनों हम पाँच शिष्य, उन बुद्धिमान गुरु की सेवा में तत्पर होकर उनके साथ रहते थे। सुमन्तु, जैमिनी, पैल - ये सब उत्तम धर्म का दृढ़तापूर्वक पालन करने वाले थे, चौथे मैं था और पाँचवें व्यासपुत्र शुकदेव थे। 9-11॥
Vaishampayanji said – King! My pious Guru Ved Vyas is a wealth of asceticism and full of knowledge. Earlier he lived on a peak of the Himalayas with the desire to gain real knowledge of the meaning of the Vedas. He was tired of doing penance after writing the history called Mahabharata. In those days, five of us disciples, ready to serve this wise Guru, lived with him. Sumantu, Jaimini, Pail who firmly followed the good religion, the fourth one was I and the fifth one was Vyasputra Shukdev. 9-11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥