Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.349.74: स्वर्ग, अन्तरिक्ष, पृथ्वी और जल में तथा सम्पूर्ण लोकों में जो भी शुभ या अशुभ कर्म कहे जाते हैं, वे सब नारायण की शक्ति से ही हो रहे हैं - ऐसा जानना चाहिए ॥ 74॥ | mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वर्ग, अन्तरिक्ष, पृथ्वी और जल में तथा सम्पूर्ण लोकों में जो भी शुभ या अशुभ कर्म कहे जाते हैं, वे सब नारायण की शक्ति से ही हो रहे हैं - ऐसा जानना चाहिए ॥ 74॥
Whatever good or bad deeds are said to be taking place in heaven, space, earth and water, and in all the worlds, they are all happening due to the power of Narayana - this should be known. ॥ 74॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि द्वैपायनोत्पत्तौ एकोनपञ्चाशदधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३४९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें द्वैपायनकी उत्पत्तिविषयक तीन सौ उनचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३४९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥