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mahabharat 12.349.72: हे मनुष्यों के स्वामी! जो लोग पंचरात्र में पारंगत हैं, उसमें बताए गए क्रम से सेवा में तत्पर हैं और अनन्य भक्ति से भगवान के शरणागत हैं, वे ही उन भगवान श्रीहरि में प्रवेश करते हैं। 72.   |   mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.349.72 
पाञ्चरात्रविदो ये तु यथाक्रमपरा नृप।
एकान्तभावोपगतास्ते हरिं प्रविशन्ति वै॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जो लोग पंचरात्र में पारंगत हैं, उसमें बताए गए क्रम से सेवा में तत्पर हैं और अनन्य भक्ति से भगवान के शरणागत हैं, वे ही उन भगवान श्रीहरि में प्रवेश करते हैं। 72.
 
O Lord of men! Those who are well versed in the Pancharatra and are devoted to the service in the order prescribed therein and have surrendered to the Lord with exclusive devotion, they enter into that Lord Shri Hari only. 72.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)