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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  12.349.70 
तमेव शास्त्रकर्तार: प्रवदन्ति मनीषिण:।
निष्ठां नारायणमृषिं नान्योऽस्तीति वचो मम॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
शास्त्रों के रचयिता विद्वान पुरुष कहते हैं कि नारायण ही समस्त शास्त्रों के परम लक्ष्य हैं, उनके समान दूसरा कोई नहीं है - यह मेरा कथन है।
 
The wise men, who are the authors of the scriptures, say that Sage Narayana is the ultimate goal of all scriptures; no one else is like him - this is my statement. 70.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)