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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा
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श्लोक 67
श्लोक
12.349.67
उमापतिर्भूतपति: श्रीकण्ठो ब्रह्मण: सुत:।
उक्तवानिदमव्यग्रो ज्ञानं पाशुपतं शिव:॥ ६७॥
अनुवाद
ब्रह्माजी के पुत्र भूतनाथ श्रीकंठ उमापति भगवान शिव ने शांतचित्त होकर पाशुपत विद्या का उपदेश दिया।
Brahmaji's son Bhootnath Shrikanth Umapati Lord Shiva preached the knowledge of Pashupat in a calm mind.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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