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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा
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श्लोक 66
श्लोक
12.349.66
अपान्तरतमाश्चैव वेदाचार्य: स उच्यते।
प्राचीनगर्भं तमृषिं प्रवदन्तीह केचन॥ ६६॥
अनुवाद
मुनिवर अपान्तरत्मा को वेदों का आचार्य कहा गया है। यहाँ कुछ लोग उन महर्षि को प्राचिंगर्भ कहते हैं।
Munivar Apantaratma is said to be the teacher of Vedas. Here some people call that Maharishi as Prachingarbha.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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