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mahabharat 12.349.65: कपिल सांख्य शास्त्र के वक्ता हैं। उन्हें परम ऋषि कहा जाता है। योगशास्त्र के आदि ज्ञाता हिरण्यगर्भ ब्रह्माजी ही हैं, अन्य कोई नहीं।   |   mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  12.349.65 
सांख्यस्य वक्ता कपिल: परमर्षि: स उच्यते।
हिरण्यगर्भो योगस्य वेत्ता नान्य: पुरातन:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
कपिल सांख्य शास्त्र के वक्ता हैं। उन्हें परम ऋषि कहा जाता है। योगशास्त्र के आदि ज्ञाता हिरण्यगर्भ ब्रह्माजी ही हैं, अन्य कोई नहीं।
 
Kapil is the speaker of Sankhya Shastra. He is called the supreme sage. The ancient knower of Yoga Shastra is Hiranyagarbha Brahmaji only, no one else.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)