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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा
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श्लोक 64
श्लोक
12.349.64
सांख्यं योग: पाञ्चरात्रं वेदा: पाशुपतं तथा।
ज्ञानान्येतानि राजर्षे विद्धि नानामतानि वै॥ ६४॥
अनुवाद
राजर्षे! सांख्य, योग, पंचरात्र, वेद और पाशुपत शास्त्र- इन विद्याओं को भिन्न-भिन्न प्रकार का मत समझो।
Rajarshe! Sankhya, Yoga, Pancharatra, Veda and Pashupat Shastra – do not consider these knowledge as different types.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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