श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  12.349.63 
वैशम्पायन उवाच
एष ते कथित: पूर्वं सम्भवोऽस्मद्‍गुरोर्नृप।
व्यासस्याक्लिष्टमनसो यथा पृष्ट: पुन: शृणु॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - "हे भगवन्! आपके द्वारा पूछे गए प्रश्न के अनुसार मैंने पहले आपको अपने गुरु व्यासजी के जन्म की कथा सुनाई, जिनका मन चिंतारहित था। अब आप अन्य बातें सुनें।" 63.
 
Vaishampayana says, "O Lord! As per the question you asked me, I have first told you the story of the birth of my Guru Vyasa, who had a mind without any worries. Now listen to other things." 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)