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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा
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श्लोक 61
श्लोक
12.349.61
मया हि सुमहत् तप्तं तप: परमदारुणम्।
पुरा मतिमतां श्रेष्ठा: परमेण समाधिना॥ ६१॥
अनुवाद
हे बुद्धिमान शिष्यों में श्रेष्ठ! पूर्वकाल में मैंने उत्तम ध्यान द्वारा अत्यन्त कठोर एवं भारी तप किया था ॥ 61॥
O best of the wise disciples! In the past I had performed very severe and heavy penance by means of excellent meditation. ॥ 61॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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