Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.349.59: इस प्रकार भगवान विष्णु की कृपा से मैं पहले अपान्तरात्मा नाम से उत्पन्न हुआ और अब उन्हीं श्रीहरि की आज्ञा से पुनः वसिष्ठ कुल के पुत्र व्यास के नाम से उत्पन्न होकर यश प्राप्त कर चुका हूँ। | mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सोऽहं तस्य प्रसादेन देवस्य हरिमेधस:।
अपान्तरतमा नाम ततो जातोऽऽज्ञया हरे:।
पुनश्च जातो विख्यातो वसिष्ठकुलनन्दन:॥ ५९॥
अनुवाद
इस प्रकार भगवान विष्णु की कृपा से मैं पहले अपान्तरात्मा नाम से उत्पन्न हुआ और अब उन्हीं श्रीहरि की आज्ञा से पुनः वसिष्ठ कुल के पुत्र व्यास के नाम से उत्पन्न होकर यश प्राप्त कर चुका हूँ।
Thus, by the grace of Lord Vishnu, I was first born with the name Apantaratma and now, by the order of the same Shri Hari, I was once again born with the name of Vyasa, son of the Vasistha clan, and have gained fame.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥