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mahabharat 12.349.55-56: "महान् पराक्रमी मुनीश्वर! संसार में आपकी अद्वितीय कीर्ति होगी। वत्स! जब सूर्यपुत्र शनैश्चर मन्वन्तर के प्रवर्तक होंगे और महामनु पद पर प्रतिष्ठित होंगे, उस मन्वन्तर में मेरी कृपा से आप मन्वादि समूहों में अग्रणी होगे। इसमें कोई संदेह नहीं है॥55-56॥   |   mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 55-56
 
 
श्लोक  12.349.55-56 
भविष्यति महासत्त्व ख्यातिश्चाप्यतुला तव।
शनैश्चर: सूर्यपुत्रो भविष्यति मनुर्महान्॥ ५५॥
तस्मिन्मन्वन्तरे चैव मन्वादिगणपूर्वक:।
त्वमेव भविता वत्स मत्प्रसादान्न संशय:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
"महान् पराक्रमी मुनीश्वर! संसार में आपकी अद्वितीय कीर्ति होगी। वत्स! जब सूर्यपुत्र शनैश्चर मन्वन्तर के प्रवर्तक होंगे और महामनु पद पर प्रतिष्ठित होंगे, उस मन्वन्तर में मेरी कृपा से आप मन्वादि समूहों में अग्रणी होगे। इसमें कोई संदेह नहीं है॥55-56॥
 
"Great powerful Munishwar! You will have a unique fame in the world. Vatsa! When the son of Surya will be the originator of Shanaishchar Manvantar and will be established on the post of Mahamanu, in that Manvantar, by my grace, you will become the leader among the Manvadi groups. There is no doubt in this. 55-56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)