श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  12.349.51 
कानीनगर्भ: पितृकन्यकायां
तस्मादृषेस्त्वं भविता च पुत्र:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
उसी ऋषि से तुम पिता के घर में रहने वाली कुमारी कन्या के पुत्र के रूप में जन्म लोगे और कनिंगर्भ (कन्या का बच्चा) नाम से प्रसिद्ध होगे॥ 51॥
 
‘From the same Rishi you will be born as the son of a virgin girl living in her father's home and will be known as Kaningarbha (child of a girl).॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)