श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.349.5 
तमादिकालेषु महाविभूति-
र्नारायणो ब्रह्ममहानिधानम्।
ससर्ज पुत्रार्थमुदारतेजा
व्यासं महात्मानमजं पुराणम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल में उदार, तेजस्वी और महान तेज से युक्त भगवान नारायण ने वैदिक ज्ञान के महान भण्डार महात्मा अजन्मा और पुराणपुरुष व्यासजी को अपने पुत्र के रूप में उत्पन्न किया था॥5॥
 
In ancient times, Lord Narayana, the generous, radiant and full of great splendor, had created Mahatma Unborn and Puranapurush Vyasji as his son, the great treasure of Vedic knowledge. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)