श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  12.349.48 
वीतरागश्च पुत्रस्ते परमात्मा भविष्यति।
महेश्वरप्रसादेन नैतद् वचनमन्यथा॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
भगवान् महेश्वर की कृपा से तुम्हारा पुत्र वैराग्य प्राप्त करके दिव्य हो जायेगा। मेरी यह बात टाली नहीं जा सकती ॥48॥
 
By the grace of Lord Maheshwar, your son will become divine by attaining renunciation. This thing of mine cannot be ignored. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)