श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  12.349.47 
धर्माणां विविधानां च कर्ता ज्ञानकरस्तथा।
भविष्यसि तपोयुक्तो न च रागाद् विमोक्ष्यसे॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
आप नाना प्रकार के धर्मों के प्रवर्तक, ज्ञानदाता और तपस्वी होंगे, परंतु आसक्ति से पूर्णतः मुक्त नहीं होंगे ॥47॥
 
You will be the originator of various types of religions, a giver of knowledge and an ascetic, but you will not be completely free from attachment. 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)