श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  12.349.45-46h 
तेषां त्वत्त: प्रसूतानां कुलभेदो भविष्यति॥ ४५॥
परस्परविनाशार्थं त्वामृते द्विजसत्तम।
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! इनमें से जो आपकी संतानें होंगी, वे आपस में ही नष्ट हो जाएँगी। आपके सहयोग के बिना उनमें फूट पड़ जाएगी।
 
‘O best of the Brahmins! Those among them who will be the descendants of your children will be divided for mutual destruction. Without your cooperation there will be dissension among them. 45 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)