श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.349.41 
वेदाख्याने श्रुति: कार्या त्वया मतिमतां वर।
तस्मात् कुरु यथाऽऽज्ञप्तं ममैतद् वचनं मुने॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
मैं बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हूँ! तुम्हें वेदों के अर्थ के लिए ऋक्, साम, यजुष आदि पृथक-पृथक श्रुतियों का संग्रह करना चाहिए। अतः तुम मेरी आज्ञा के अनुसार कार्य करो। मुझे तुमसे बस इतना ही कहना है। 41॥
 
I am the best among the wise! You should collect separate shruti like Rik, Sama, Yajush etc. for the interpretation of Vedas. Therefore, you work as per my orders. This is all I have to say to you. 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)