श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  12.349.38-39 
अथ भूयो जगत‍्स्रष्टा भो:शब्देनानुनादयन्॥ ३८॥
सरस्वतीमुच्चचार तत्र सारस्वतोऽभवत्।
अपान्तरतमा नाम सुतो वाक्सम्भव: प्रभु:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् जगत् के रचयिता श्रीहरि ने 'भो:' शब्द से सम्पूर्ण दिशाओं को गुंजायमान करते हुए सरस्वती (वाणी) का उच्चारण किया। इससे वहाँ सारस्वतका उत्पन्न हुई। सरस्वती या वाणी से उत्पन्न उस शक्तिशाली पुत्र का नाम 'अपान्तरात्मा' था। 38-39॥
 
After that, the creator of the world Shri Hari uttered Saraswati (voice) resonating all the directions with the word 'Bho:'. Due to this, Saraswatka emerged there. The name of that powerful son born from Saraswati or speech was 'Apantaratma'. 38-39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)