Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.349.35: मैं पाताल में शेषनाग रूप में निवास करता हूँ और इस पृथ्वी को धारण करता हूँ, और मेरे द्वारा धारण किए जाने से यह सम्पूर्ण चर-अचर जगत् को धारण करती है॥ 35॥ | mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं पाताल में शेषनाग रूप में निवास करता हूँ और इस पृथ्वी को धारण करता हूँ, और मेरे द्वारा धारण किए जाने से यह सम्पूर्ण चर-अचर जगत् को धारण करती है॥ 35॥
I reside in the netherworld in the form of Sheshnag and hold this earth, and being held by me, it holds the entire animate and inanimate world.॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥