श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.349.34 
निग्रहेण च पापानां साधूनां प्रग्रहेण च।
इयं तपस्विनी सत्या धारयिष्यति मेदिनी॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
‘पापियों को दण्ड देकर और साधुओं पर दया करके यह तपस्वी, सत्यस्वरूप पृथ्वी अपने बल पर खड़ी रह सकेगी ॥ 34॥
 
‘By punishing the sinners and showing mercy to the saints, this ascetic, true form of the Earth will be able to stand on its strength. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)