श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.349.33 
तत्र न्याय्यमिदं कर्तुं भारावतरणं मया।
अथ नानासमुद्भूतैर्वसुधायां यथाक्रमम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
अतः अब मेरे लिए यही उचित होगा कि मैं इस भार से मुक्ति पाने के लिए पृथ्वी पर क्रमशः अनेक अवतार धारण करूँ॥ 33॥
 
‘Therefore it will now be appropriate for me to gradually take various incarnations on Earth to relieve myself of this burden.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)