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mahabharat 12.349.32: वे सब दैत्य वरदान के अभिमान से युक्त होकर देवताओं और तपोधन ऋषियों के समूहों को अवश्य ही बाधा पहुँचाएँगे ॥32॥   |   mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.349.32 
अवश्यमेव तै: सर्वैर्वरदानेन दर्पितै:।
बाधितव्या: सुरगणा ऋषयश्च तपोधना:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
वे सब दैत्य वरदान के अभिमान से युक्त होकर देवताओं और तपोधन ऋषियों के समूहों को अवश्य ही बाधा पहुँचाएँगे ॥32॥
 
Being proud of the boon, all those demons will definitely cause hindrance to the groups of gods and Tapodhan sages. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)