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mahabharat 12.349.31: इस पृथ्वी पर बहुत से शक्तिशाली दानव, राक्षस और राक्षस होंगे जो तपस्या करके उत्तम वरदान प्राप्त करेंगे ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.349.31 
बहवो बलिन: पृथ्व्यां दैत्यदानवराक्षसा:।
भविष्यन्ति तपोयुक्ता वरान् प्राप्स्यन्ति चोत्तमान्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वी पर बहुत से शक्तिशाली दानव, राक्षस और राक्षस होंगे जो तपस्या करके उत्तम वरदान प्राप्त करेंगे ॥31॥
 
‘On this earth there will be many powerful demons, devils and monsters who will engage in penance and obtain the best of boons. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)