श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.349.30 
दैत्यदानवगन्धर्वरक्षोगणसमाकुला।
जाता हीयं वसुमती भाराक्रान्ता तपस्विनी॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
किन्तु दानवों, पिशाचों, गंधर्वों और राक्षसों से ग्रस्त यह तपस्वी पृथ्वी भारग्रस्त हो गई है।
 
But this ascetic earth, infested with demons, devils, Gandharvas and monsters, has become burdened.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)