Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.349.3: वैशम्पायनजी बोले - राजन! अज्ञानरूपी अंधकार को दूर करने वाले ज्ञानसूर्य, जो यमुना नदी के तट पर द्वीप में पराशर मुनि के साथ संयोग करके ज्ञानी एवं परम दानी महर्षि के पुत्र रूप में उत्पन्न हुए थे, उन गुरुदेव व्यासजी को मेरा नमस्कार है॥3॥ | mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी बोले - राजन! अज्ञानरूपी अंधकार को दूर करने वाले ज्ञानसूर्य, जो यमुना नदी के तट पर द्वीप में पराशर मुनि के साथ संयोग करके ज्ञानी एवं परम दानी महर्षि के पुत्र रूप में उत्पन्न हुए थे, उन गुरुदेव व्यासजी को मेरा नमस्कार है॥3॥
Vaishampayanji said – King! My salutations to Gurudev Vyasji, the sun of knowledge who removes the darkness of ignorance, who was born as a son of the knowledgeable and extremely generous Maharishi by the union of his body with Parashar Muni in the island on the banks of river Yamuna. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥