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mahabharat 12.349.29: कुछ समय पश्चात भगवान के मन में एक और विचार उत्पन्न हुआ। वे सोचने लगे, इन सभी प्राणियों की रचना परम ब्रह्म ने की है।   |   mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.349.29 
अथास्य बुद्धिरभवत् पुनरन्या तदा किल।
सृष्टा: प्रजा इमा: सर्वा ब्रह्मणा परमेष्ठिना॥ २९॥
 
 
अनुवाद
कुछ समय पश्चात भगवान के मन में एक और विचार उत्पन्न हुआ। वे सोचने लगे, इन सभी प्राणियों की रचना परम ब्रह्म ने की है।
 
‘After some time, another thought arose in the mind of the Lord. He started thinking, the Supreme Brahma has created all these creatures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)