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mahabharat 12.349.27: फिर 'बहुत अच्छा' कहकर उन्होंने श्रीहरि की आज्ञा स्वीकार कर ली। इस प्रकार उन्हें सृष्टि की आज्ञा देकर भगवान वहीं अन्तर्धान हो गए॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.349.27 
बाढमित्येव कृत्वासौ यथाऽऽज्ञां शिरसा हरे:।
एवमुक्त्वा स भगवांस्तत्रैवान्तरधीयत॥ २७॥
 
 
अनुवाद
फिर 'बहुत अच्छा' कहकर उन्होंने श्रीहरि की आज्ञा स्वीकार कर ली। इस प्रकार उन्हें सृष्टि की आज्ञा देकर भगवान वहीं अन्तर्धान हो गए॥ 27॥
 
Then saying 'very good' he accepted the command of Shri Hari. Thus after giving him the order of creation, God disappeared right there.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)