श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.349.26 
अथैनं बुद्धिसंयुक्तं पुन: स ददृशे हरि:।
भूयश्चैव वच: प्राह सृजेमा विविधा: प्रजा:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान ब्रह्मा को सृष्टि-सम्बन्धी बुद्धि प्राप्त हो गई, तब भगवान हरि ने पुनः उनकी ओर स्नेहपूर्वक देखा और कहा, 'अब तुम इन नाना प्रकार के प्राणियों की सृष्टि करो।'
 
When Lord Brahma was endowed with the wisdom related to creation, Lord Hari again looked at him with affection and said, 'Now you create these various kinds of creatures.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)