श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.349.25 
ब्रह्माणं प्रविशस्वेति लोकसृष्टॺर्थसिद्धये।
ततस्तमीश्वरादिष्टा बुद्धि: क्षिप्रं विवेश सा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
‘तुम जगत् की रचना का अभीष्ट कार्य पूर्ण करने के लिए ब्रह्माजी के भीतर प्रवेश करो।’ भगवान् का यह आदेश पाकर बुद्धि शीघ्र ही ब्रह्माजी में प्रविष्ट हो गई।
 
“You enter within Brahmaji to accomplish the desired task of creating the world.’ After receiving this order from God, the intellect soon entered Brahmaji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)