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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा
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श्लोक 24
श्लोक
12.349.24
स तामैश्वर्ययोगस्थां बुद्धिं गतिमतीं सतीम्।
उवाच वचनं देवो बुद्धिं वै प्रभुरव्यय:॥ २४॥
अनुवाद
‘ऐश्वर्ययोग में स्थित उस उन्नत बुद्धि वाली सती-साध्वी से अमर भगवान नारायणदेव ने कहा-॥24॥
‘The immortal Lord Narayandev said to that Sati-Sadhvi progressive intellect situated in Aishwaryayoga – ॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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