Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.349.23: विचार करते ही उस मूर्ति की बुद्धि उन शक्तिशाली श्रीहरिकी की सेवा में उपस्थित हो गई। तत्पश्चात्, अन्यों के वश में न रहने वाले भगवान नारायण ने स्वयं उस समय उस बुद्धि को योगबल से संपन्न किया। 23॥ | mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विचार करते ही उस मूर्ति की बुद्धि उन शक्तिशाली श्रीहरिकी की सेवा में उपस्थित हो गई। तत्पश्चात्, अन्यों के वश में न रहने वाले भगवान नारायण ने स्वयं उस समय उस बुद्धि को योगबल से संपन्न किया। 23॥
As soon as he thought, the idol's intellect became present in the service of that powerful Sri Hariki. Thereafter, Lord Narayana, who was not controlled by others, himself endowed that intellect with the power of yoga at that time. 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥