श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.349.21 
का शक्तिर्मम देवेश प्रजा: स्रष्टुं नमोऽस्तु ते।
अप्रज्ञावानहं देव विधत्स्व यदनन्तरम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मुझमें मनुष्यों की सृष्टि करने की क्या शक्ति है? आपको नमस्कार है। हे प्रभु! मुझे सृष्टि-विद्या से सर्वथा रहित जानकर आप जो उचित समझें, वही करें।॥21॥
 
“O Lord! What power do I have to create people? Salutations to you. O Lord! Knowing that I am completely devoid of the wisdom of creation, do whatever you deem fit.”॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)