Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.349.20: जब भगवान ने यह आदेश दिया, तब ब्रह्माजी का मन चिन्ता से व्याकुल हो गया। सृष्टि-कार्य से विमुख होकर उन्होंने कल्याणकारी भगवान श्रीहरि को प्रणाम किया और इस प्रकार बोले-॥20॥ | mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स एवमुक्तो विमुखश्चिन्ताव्याकुलमानस:।
प्रणम्य वरदं देवमुवाच हरिमीश्वरम्॥ २०॥
अनुवाद
जब भगवान ने यह आदेश दिया, तब ब्रह्माजी का मन चिन्ता से व्याकुल हो गया। सृष्टि-कार्य से विमुख होकर उन्होंने कल्याणकारी भगवान श्रीहरि को प्रणाम किया और इस प्रकार बोले-॥20॥
‘When the Lord gave this order, Brahmaji's mind became restless with worry. Turning away from the work of creation, he bowed to the benevolent god Shri Hari and spoke thus -॥ 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥