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mahabharat 12.349.2: मुनि! क्या ये सब एक ही लक्ष्य बताते हैं या भिन्न-भिन्न लक्ष्य बताते हैं? कृपया मेरे इस प्रश्न का पूरा उत्तर दीजिए तथा क्रम से प्रवृत्तियों का भी वर्णन कीजिए।॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.349.2 
किमेतान्येकनिष्ठानि पृथङ्‍‍निष्ठानि वा मुने।
प्रब्रूहि वै मया पृष्ट: प्रवृत्तिं च यथाक्रमम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
मुनि! क्या ये सब एक ही लक्ष्य बताते हैं या भिन्न-भिन्न लक्ष्य बताते हैं? कृपया मेरे इस प्रश्न का पूरा उत्तर दीजिए तथा क्रम से प्रवृत्तियों का भी वर्णन कीजिए।॥2॥
 
Muni! Do all these explain the same goal or do they explain different goals? Please answer this question of mine in its entirety and also describe the tendencies in sequence.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)