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mahabharat 12.349.19: हे ब्रह्म! तुम मनुष्यों की सृष्टि करने के लिए मेरी नाभि से उत्पन्न हुए हो और तुम इसमें समर्थ हो; अतः सजीव और निर्जीव सहित नाना प्रकार के प्राणियों की सृष्टि करो।॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.349.19 
मम त्वं नाभितो जात: प्रजासर्गकर: प्रभु:।
सृज प्रजास्त्वं विविधा ब्रह्मन् सजडपण्डिता:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्म! तुम मनुष्यों की सृष्टि करने के लिए मेरी नाभि से उत्पन्न हुए हो और तुम इसमें समर्थ हो; अतः सजीव और निर्जीव सहित नाना प्रकार के प्राणियों की सृष्टि करो।॥19॥
 
Brahman! You have been born from my navel to create humans and you are capable of doing this; therefore, create various kinds of creatures, including living and non-living things.'॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)