Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.349.17-18: ‘जब सातवें कल्प के प्रारम्भ में ब्रह्माजी के कमल से सातवीं बार उत्पन्न होने का अवसर आया, तब सत्-अत्म से रहित, अनन्त तेजस्वी महायोगी भगवान नारायण ने सर्वप्रथम अपने नाभि कमल से ब्रह्माजी को उत्पन्न किया। ब्रह्माजी के प्रकट होने पर भगवान ने उनसे यह कहा—॥17-18॥ | mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘जब सातवें कल्प के प्रारम्भ में ब्रह्माजी के कमल से सातवीं बार उत्पन्न होने का अवसर आया, तब सत्-अत्म से रहित, अनन्त तेजस्वी महायोगी भगवान नारायण ने सर्वप्रथम अपने नाभि कमल से ब्रह्माजी को उत्पन्न किया। ब्रह्माजी के प्रकट होने पर भगवान ने उनसे यह कहा—॥17-18॥
‘When at the beginning of the seventh kalpa the occasion came for the seventh time for Brahmaji to be born from a lotus, then the infinitely radiant Mahayogi Lord Narayana, who was devoid of good and evil, first created Brahmaji from his navel lotus. When Brahmaji appeared, the Lord said this to him—॥17-18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥