श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.349.16 
शृणुध्वमाख्यानवरमिदमार्षेयमुत्तमम्।
आदिकालोद्भवं विप्रास्तपसाधिगतं मया॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणो! ऋषियों की यह अद्भुत कथा सुनो। प्राचीन काल की यह कथा मैंने तपस्या द्वारा सीखी है।
 
O Brahmins! Listen to this wonderful story about the sages. I have learnt this tale of ancient times through penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)