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mahabharat 12.349.15: तत्त्ववेत्ता व्यासजी ने पहले हमें वेदों और महाभारत का अर्थ समझाया, तत्पश्चात् भगवान नारायण को अपने जन्म की कथा इस प्रकार सुनानी आरम्भ की -॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.349.15 
स पूर्वमुक्त्वा वेदार्थान् भारतार्थांश्च तत्त्ववित्।
नारायणादिदं जन्म व्याहर्तुमुपचक्रमे॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तत्त्ववेत्ता व्यासजी ने पहले हमें वेदों और महाभारत का अर्थ समझाया, तत्पश्चात् भगवान नारायण को अपने जन्म की कथा इस प्रकार सुनानी आरम्भ की -॥15॥
 
The philosopher Vyasa first explained to us the meaning of the Vedas and the Mahabharata. After that he began to narrate to Lord Narayana the story of his birth in the following manner -॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)