श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.349.14 
कथान्तरेऽथ कस्मिंश्चित् पृष्टोऽस्माभिर्द्विजोत्तम:।
वेदार्थान् भारतार्थांश्च जन्म नारायणात् तथा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
एक दिन वार्तालाप के प्रसंग में हमने द्विजश्रेष्ठ व्यासजी से वेदों और महाभारत का अर्थ तथा भगवान नारायण के जन्म की कथा पूछी॥14॥
 
One day, in the context of a conversation, we asked Dwijashrestha Vyasji about the meaning of the Vedas and Mahabharata and the story of Lord Narayana's birth. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)