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mahabharat 12.349.13: वहाँ व्यासजी सम्पूर्ण वेदों और महाभारत का अर्थ उनके अंशों सहित सुनाते थे और हम शिष्यों को शिक्षा भी देते थे। हम सब लोग सदैव तत्पर रहकर उन एकाग्रचित्त और संयमी गुरु की सेवा करते थे॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.349.13 
वेदानावर्तयन् साङ्गान् भारतार्थांश्च सर्वश:।
तमेकमनसं दान्तं युक्ता वयमुपास्महे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ व्यासजी सम्पूर्ण वेदों और महाभारत का अर्थ उनके अंशों सहित सुनाते थे और हम शिष्यों को शिक्षा भी देते थे। हम सब लोग सदैव तत्पर रहकर उन एकाग्रचित्त और संयमी गुरु की सेवा करते थे॥13॥
 
There Vyasa used to recite the meanings of all the Vedas and the Mahabharata along with their parts and also used to teach us disciples. All of us used to remain always ready and serve that focused and self-controlled Guru.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)