श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  12.348.88 
कृष्ण एव हि लोकानां भावनो मोहनस्तथा।
संहारकारकश्चैव कारणं च विशांपते॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! भगवान श्रीकृष्ण सम्पूर्ण लोकों के पालक, मनोहर, संहारक और कारण हैं (अतः तुम्हें भक्तिपूर्वक उनका भजन करना चाहिए)॥88॥
 
Prajanath! Lord Shri Krishna is the preserver, charmer, destroyer and cause of all the worlds (so you should worship him with devotion). 88॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि नारायणीये ऐकान्तिकभावेऽष्टचत्वारिंशदधिक-त्रिशततमोऽध्याय:॥ ३४८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें नारायणकी महिमा एवं उनके प्रति ऐकान्तिकभावविषयक तीन सौ अड़तालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३४८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)