श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  12.348.86 
व्यासश्चाकथयत् प्रीत्या धर्मपुत्राय धीमते।
स एवायं मया तुभ्यमाख्यात: प्रसृतो गुरो:॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी ने भी बुद्धिमान धर्मपुत्र युधिष्ठिर को प्रेमपूर्वक इसी धर्म का उपदेश दिया था। गुरु के मुख से प्रकट हुए उसी धर्म का मैंने यहाँ तुम्हारे लिए वर्णन किया है। 86॥
 
Vyasji also lovingly preached this religion to the intelligent son of Dharma, Yudhishthira. I have described for you here the same religion that was revealed from the mouth of the Guru. 86॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)