Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.348.85: इस प्रकार महाभाग नारदजी ने मेरे गुरु व्यासजी से श्वेतवस्त्रधारी गृहस्थों और गेरुआवस्त्रधारी तपस्वियों की अविनाशी एकान्त गति का वर्णन किया है ॥85॥ | mahabharat अध्याय 12.348: सात्वत-धर्मकी उपदेश-परम्परा तथा भगवान् के प्रति ऐकान्तिक भावकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं हि स महाभागो नारदो गुरवे मम।
श्वेतानां यतिनां चाह एकान्तगतिमव्ययाम्॥ ८५॥
अनुवाद
इस प्रकार महाभाग नारदजी ने मेरे गुरु व्यासजी से श्वेतवस्त्रधारी गृहस्थों और गेरुआवस्त्रधारी तपस्वियों की अविनाशी एकान्त गति का वर्णन किया है ॥85॥
In this way, Mahabhaga Naradji has described to my Guru Vyasji the imperishable solitary movement of the white-clad householders and the orange-clad ascetics. 85॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥